शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

"माँ सरस्वती वन्दना"





या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥2॥
हे माँ वीणावादिनी
 करते है अभिनन्दन 
सातों सुरों की जन्मदात्री
दिन करते  करते है 
तुम्हारी सुमिरन।
हर जगह व्याप्त 
माया है आपकी, 
दुखियों के सर पर 
छाया है आपकी। 
हंस की सवारी
पुस्तक लिए हाथों में 
हर पल चाहत है
 दर्शन हो आपके।
आप विद्या की देवी
करुणा के सागर, 
करें प्रसार दुनिया में
सत्य बौद्धिक ज्ञान,
मैं मूढ़ अज्ञानी
नही कर  सकता 
आपके गुणों का बखान। 

                                    




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16 टिप्‍पणियां:

  1. माँ सरस्वती की बहुत सुंदर स्तुति माँ सरस्वती की कृपा हमेशा आपके जीवन में बनी रहे बसंत पंचमी की बधाई

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  2. सुन्दर प्रासंगिक /सार्वकालिक प्रस्तुति .वसंत शुभ हो .

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  3. बसंत पंचमी की आपको हार्दिक बधाइयाँ.

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  4. माँ सरस्वती की बहुत सुंदर वंदना,बसंत पंचमी की आपको हार्दिक बधाइयाँ

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  5. बसंत पंचमी की आपको हार्दिक बधाइयाँ

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  6. बसंत पंचमी की आपको हार्दिक बधाइयाँ.

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  7. आपकी पोस्ट की चर्चा 17- 02- 2013 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है कृपया पधारें ।

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  8. माँ रासस्वती को नमन ...
    बसंत पंचमी को हार्दिक बधाई ...

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  9. सुन्दर ह्रदय से की गयी सुंदर प्रार्थना!

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