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शनिवार, 8 दिसंबर 2012

आँसू


दर्द सीने  से उठा तो आँखों से आँसू निकले,
रात आयी तो गजल कहने के पहलु निकले।
              दिल का हर दर्द यु शेरो में उभर आया है,
              जैसे मुरझाये हुए फूलो में खुशबु निकले।
जब भी बिछड़ा है कोई शख्स तेरा ध्यान आया,
हर नये गम से  तेरी याद  के  पहलु--  निकले।
              अश्क उमड़े तो सुलगने लगी  यादे 'राज' की,
              खुश्क पत्तो को जलते हुए जुगनू--- निकले।











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