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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

"धरा बचायें: हाइकू"





१.
पृथ्वी की गोद
पेड़ों की हरियाली
सूनी पड़ी है

२.
कटते वृक्ष
बढ़ता प्रदुषण
चिन्ता सताए

३.
रोती जमीन
प्रकृति की लाचारी
जख्मी आँचल

४.
उड़ते मेघ
सींचे कैसे धरती
सुखी नदियाँ

५.
सुनी बगिया
कोयल भी खामोश
खो गयी कहाँ

६.
थके पथिक
छाया को तरसते
मिली न छाया

७.
वन से जल
जल से है जीवन
इसे बचायें

८.
जल जीवन
जल है तो कल है
सभल जाएँ

९.
गंगा-यमुना
होती है रोज मैली
रखें निर्मल

१०.
लगायें पेड़
फैलायें हरियाली
धरा बचायें



"हम सभी जो कि इस स्वच्छ श्यामला धरा के रहवासी हैं हमारा यह दायित्व है कि दुनिया में क़दम रखने से लेकर आखिरी साँस तक हम पर प्यार लुटाने वाली इस धरा को बचाए रखने के लिए जो भी कर सकें करें, क्योंकि यह वही धरती है जो हमारे बाद भी हमारी निशानियों को अपने सीने से लगाकर रखेगी। लेकिन यह तभी संभव होगा जब वह हरी-भरी तथा प्रदूषण से मुक्त रहे और उसे यह उपहार आप ही दे सकते हैं। "

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