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बुधवार, 6 मार्च 2013

खफा-ए-जिन्दगी



 

 
खफा-ए -जिन्दगी  को भुला कर के  तो देखिए ,
ख्वाबो की दुनियाँ से निकल कर के तो देखिए ।
 
तेरी यादों के  ही  सहारे जी  रहें हैं  अब तलक,
दिल के झरोंखे में कोई दीप जला कर के देखिए। 
 
हम समझ न पाए अब तक आपकी रुसवाई को,
नस्तरे दिल से अपना इल्जाम हटा के तो देखिए।
 
दस्ताने-ए-दिल को मेरी जुबां से  सुना ही नही,
तिलिस्मे बेहिसी को कभी तोड़  के तो देखिए।
 
दर्दे-दिल को सहते हुए कितने सदियाँ गुजर गयी,
अपने माजी के मजार पर कभी आ कर के देखिए।
 
लगता अब उतर जायेंगे लहद में अहबाब के कांधों से,
रब के दर पर मेरे गुनाहों की सजा सुना कर तो देखिये। 
 
 
अर्थ:  तिलिस्मे =भवंर जाल, माजी=अतीत, मजार =कब्र, लहद=कब्र, अहबाब=मित्र जन 
 
 
चलते चलते प्रस्तुत है:
                                करोगे याद गुजरे हसीन यादों को,
                                         तरसोगे हमारे साथ एक पल बिताने को।
                                                         फिर आवाज दोगे हमें बुलाने को,
                                                                 नहीं दरवाजा होगा स्वर्ग से वापस आने का।।


मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

अंधेरे दिल में


 तुम्हारी यादों को सीने से लगा रखा है,
 अंधेरे दिल में एक चिराग जला रखा है।
 जीने की उम्मीद जागी है तुमसे लाख कर,
हमने सेहरा को शबनम से साजा रखा है।
तुम्हारे इंतज़ार में खुली है कब से आंखें,
हमने  राहों में  पलको को बिछा  रखा है।
 हर लम्हा उन्ही कीयाद में तडपता है दिल,
दर्दे दिल को हमने पत्थरों सा दबा  रखा है।
 उनको भी नहीं मालूम कितना चाहते है हम, 
प्यार में उनके हमने खुद को भुला रखा है।
 जिंदगी है जब तक  सिर्फ उन्हें  ही चाहेंगे, 
 
दिल में "राज"  ने राज़ को छुपा  रखा है।





                            



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