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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

हैवानियत

जैसा की आप सब को मालूम ही हो गया होगा की कल पाकिस्तान ने आपस में हुए युद्धबिराम को उल्लंघन करते हुए जम्मू कश्मीर के पूंछ में हमारे दो जवानों की हत्या कर  दी।बर्बरता की इन्तहा पार करते हुए हमारे देशभक्त जवानों के मृत शरीर को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किये और उनके सिर को भी काट कर  ले गये,अपने देश को सरप्राइज देने के लिए।हम हमारी सरकार हमेशा दोस्ती की दम्भ भरते है,सदभावना की बाते करते है।भारत पाक के बीच कथित दोस्ती की क्रिकेट सीरीज खत्म हुए 48 घंटे के अंदर ही पाक ने दोस्ती के उपहार स्वरूप ऐसा कारनामे को अंजाम दिया।हमारी सरकार है संशय में है की इस घटना पर क्या रिएक्ट करें,शायद सोच रही है तमाम घटनाओं की तरह इस बार भी हम और हमारी मीडिया कुछ दिनों हो-हल्ला मचायेगी फिर सब कुछ शान्त।फिर हमारे देश के कर्णधार शांति सौहार्द बनाये रखने के लिए वहाँ का सरकारी खर्च पर दौरे करेंगे अपनी क्रिकेट टीम को शांति बनाने के लिए पाकिस्तान भेजेंगे।अभी भी वक्त है जागो देश के "कर्णधारो"।
                                         चले इसी सन्दर्भ में हम राम प्रसाद बिस्मिल को याद करते है।


    है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर
    और हम तैयार  हैं सीना लिये अपना इधर
    खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है
    सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

                       हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से
                       सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
                       और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है
                       सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

     हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न
     जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम
     जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है
     सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

                      दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब
                      होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज
                      दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है
                      सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है


 "उन शहीद जवानों को श्रधांजली"


शनिवार, 29 दिसंबर 2012

सबको जगा कर सो गयी वो ...........


   वह तो आँखें बंद कर  सो गयी लेकिन हमे जगा  गयी  वो,
   हमारे अंधक कूपो  में  की रौशनी की एक लौ जला गयी वो।
           आज जब वह चली गयी दरिंदो भरी  की दुनिया को छोडकर,
           अब देश के कर्णधरो के कानो में घंटी बजी है क्या  सोचकर।
  अनेको सवाल छोड़ गयी हमे कुम्भकर्ण रूपी नींद से जगाकर,
  क्या हम  देशवासी  कभी इंसाफ दिल पायेगे उस आत्मा को।
           काटों को अपने दामन में संजोकर चली गयी यम की डोली में,
           हमारा  फर्ज नही बनता कुछ पुष्प अर्पित करें उस झोली ...में। 


आज दरिंदगी की शिकार अबला की बंद जुबां पूछ रही है-पाप हिंसा का दहशत फ़ैलाने वालो क्या तुम्हारी जिन्दगी तुम पर बोझ नही है! 16 दिसम्बर से हमारी अवाम दोषियों के सजा के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहें  है। क्या हमारी सरकार हमारे कर्णधार पीडिता के परिवार को इंसाफ दिला पाएंगे,गहरी नींद से जगकर क्या कोई कठोर निर्णय ले पाएंगे।हमारी सरकार मौन क्यों है,क्यों नही सर्वसम्मत से कोई ऐसा कानून बना रही है की बलात्कार के किसी भी दोषी को ऐसी सजा दी जाय जो इंसाफ  का एक मिसाल हो। बलात्कार एव हत्या के इन दोषियों को तो फांसी से भी कोई कठोर सजा देना चाहिए।अपने देश का यह दुर्भाग्य ही रहा है की देश और समाज के लिए निःस्वार्थ भाव से जिम्मेवारी निभने वाले सृजनकर्ताओं का अभाव रहा है। हमारे नेता केवल ब्यान देने में आगे है।हमारी सरकार को प्रायोजित प्रदर्शन की आदत सी हो गया है।हमे हमारी सरकार को इस भूल को स्वीकार करना चाहिए की यदि दुष्कर्म के खिलाफ सजा का कोई कठोर प्रावधान होता तो हमे शायद यह दिन देखने को नही मिलता।आज आदर्शवाद की लम्बी चौड़ी बातें बखारने वाले बहुत  मिल जायेंगे पर उसे अपने जीवनक्रम में उतरने की भी हिम्मत होनी चाहिए।इतिहास साक्षी है हमारे द्रढ़ सकल्प के आगे बड़े से बड़े देव दानव भी पराजित हुए हैं। आज हमारे सामने इस मुद्दे पर कई सवाल उठ रहें है ......क्या हमारी सरकार ऐसे कानून बनाएगी जिससे अपराधियों में खौफ पैदा हो, क्या पीडिता की क़ुरबानी बेकार जाएगी,क्या दोषियों को फासी मिलेगी,क्या आने वाले दिनों में  दुराचारियों से समाज भयमुक्त होगा आदि आदि।
                                    लूटा बहन बेटियों के दामन् सर उठाये हुए है हम,
                                    खुद से खुद  की नजर  को  चुराए ....   हुए हैं हम।

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