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बुधवार, 12 जुलाई 2017

आँखों की विशेषता-Specialty of eyes

हमारे शरीर के सभी अंगों में सिर्फ आँखें ही ऐसा एकमात्र अंग है जिसका हमारी मनोभावना से सीधा सम्बन्ध होता है। आँखें हमारी मनोभावना की अभिव्यक्ति करती है, अन्य कोई अंग नहीं करता। हमारी आँखें दिल का आईना होती है, जैसा कि अंग्रेजी में कहा गया है - Face is the Index of the heart. आँखों की स्थिति ऐसी की कोई लज्जाजनक बात देखते ही आँखें शर्म से झुक जाती है। उडी हृदय को आनंद की अनुभूति होती है तो आँखें चमकने लगती है; क्रोध पैदा होते ही आँखें जल उठती है और करुणा भाव यदि पैदा हो जाए तो आँखों में आसूं छलक उठते हैं
                                                        आँखें मन और भाव का दर्पण हैं। भावनाओं एवं संवेदना की स्पष्ट छाप इसकी गहराई में अंकित होती है। आंखें वह द्वार हैं, जिसमें प्रवेश कर अंतरात्मा की झलक−झाँकी पाई जा सकती है। आँखों में व्यक्ति का व्यक्तित्व झलकता है। आँखों के आधार पर व्यक्तित्व की पहचान की जाती है। आँखों की भाषा की महता और उपयोगिता उस समय बहुत बढ़ जाती है जब बोलने की स्थिति न हो, जरूरत न हो और इच्छा न हो। ऐसे हालात में वाणी का काम आँखें किया करती है इसलिए आँखों पर विवेक का नियंत्रण रखना जरुरी हो जाता है। आँखें मन का भेद खोल देती है इसलिए किसी को देखते समय इस बात को ख्याल रखना होगा की आँखें किस भाव की अभिव्यक्ति कर रही है।

नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं 
हम घबराकर ऑंखें झुका लेते हैं 
कौन मिलाए उनकी आँखों से ऑंखें 
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते है .


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